दर्शयंस्तद्विदां लोक आत्मनो भृत्यवश्यताम् ।
व्रजस्योवाह वै हर्षं भगवान् बालचेष्टितै: ॥ ९ ॥
अनुवाद
संसार भर के उन पवित्र भक्तों को, जो उनके कार्यकलापों को समझ सकते थे, परम पुरुषोत्तम कृष्ण ने दिखा दिया कि वे उनके भक्तों अर्थात् सेवकों द्वारा कैसे वश में किए जा सकते हैं। इस तरह उन्होंने अपनी बचपन की लीलाओं से व्रजवासियों के हर्ष में वृद्धि की।
Lord Krishna showed the pure devotees of the world who understood His activities how He could be controlled by His devotees, that is, His servants. In this way, by His childhood pastimes, He increased the joy of the people of Vraja.
तात्पर्य
भक्तों के आनंद को बढ़ाने के लिए कृष्ण ने जो बाल्यकालीन लीलाएं कीं वह उनकी एक अन्य दिव्य विनोद थी। उन्होंने ये लीलाएं न केवल व्रजभूमि के निवासियों के लिए ही कीं, अपितु दूसरों के लिए भी कीं जो उनकी बाहरी क्षमता और ऐश्वर्य से मोहित हो गए। आंतरिक भक्त जो केवल कृष्ण के प्रेम में लीन थे और बाहरी भक्त जो उनकी असीमित क्षमता से मोहित थे, दोनों को कृष्ण की अपने सेवकों के प्रति विनम्र रहने की इच्छा की जानकारी थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥