श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.11.7 
गोपीभि: स्तोभितोऽनृत्यद् भगवान्बालवत्‍क्‍वचित् ।
उद्गायति क्‍वचिन्मुग्धस्तद्वशो दारुयन्त्रवत् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
गोपियाँ कहतीं, "हे कृष्ण, अगर तुम नाचोगे तो मैं तुम्हें आधी मिठाई दूँगी।" ऐसे शब्दों या तालियाँ बजाकर सभी गोपियाँ अलग-अलग तरीकों से कृष्ण को प्रोत्साहित करती थीं। ऐसे अवसरों पर, वे भगवान होते हुए भी मुस्कुराते थे और उनकी इच्छा के अनुसार नाचते थे, जैसे कि वह उनके हाथ की कठपुतली हो। कभी-कभी वह उनकी इच्छानुसार जोर-जोर से गाते थे। इस तरह, कृष्ण पूरी तरह से गोपियों के वश में आ गए।
 
गोपियाँ कहतीं, "हे कृष्ण, अगर तुम नाचोगे तो मैं तुम्हें आधी मिठाई दूँगी।" ऐसे शब्दों या तालियाँ बजाकर सभी गोपियाँ अलग-अलग तरीकों से कृष्ण को प्रोत्साहित करती थीं। ऐसे अवसरों पर, वे भगवान होते हुए भी मुस्कुराते थे और उनकी इच्छा के अनुसार नाचते थे, जैसे कि वह उनके हाथ की कठपुतली हो। कभी-कभी वह उनकी इच्छानुसार जोर-जोर से गाते थे। इस तरह, कृष्ण पूरी तरह से गोपियों के वश में आ गए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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