श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.11.35 
वृन्दावनं सम्प्रविश्य सर्वकालसुखावहम् ।
तत्र चक्रुर्व्रजावासं शकटैरर्धचन्द्रवत् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
इस तरह वे वृंदावन में दाखिल हुए, जहाँ सभी ऋतुओं में रहना सुखद है। उन्होंने अपनी बैलगाड़ियों को अर्धचंद्राकार आकार में रखकर अपने रहने के लिए एक अस्थायी स्थान बनाया।
 
इस तरह वे वृंदावन में दाखिल हुए, जहाँ सभी ऋतुओं में रहना सुखद है। उन्होंने अपनी बैलगाड़ियों को अर्धचंद्राकार आकार में रखकर अपने रहने के लिए एक अस्थायी स्थान बनाया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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