श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.11.34 
तथा यशोदारोहिण्यावेकं शकटमास्थिते ।
रेजतु: कृष्णरामाभ्यां तत्कथाश्रवणोत्सुके ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
इस तरह माता यशोदा और रोहिणी देवी, श्रीकृष्ण और बलराम की लीलाओं को बड़े ही आनंद से सुनते हुए, उन्हें एक क्षण भी अपने से अलग नहीं करना चाहती थीं, इसलिए वे दोनों के साथ एक ही बैलगाड़ी में चढ़ गईं। ऐसे में वे सभी बहुत ही सुंदर लग रहे थे।
 
इस तरह माता यशोदा और रोहिणी देवी, श्रीकृष्ण और बलराम की लीलाओं को बड़े ही आनंद से सुनते हुए, उन्हें एक क्षण भी अपने से अलग नहीं करना चाहती थीं, इसलिए वे दोनों के साथ एक ही बैलगाड़ी में चढ़ गईं। ऐसे में वे सभी बहुत ही सुंदर लग रहे थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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