श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.11.33 
गोप्यो रूढरथा नूत्नकुचकुङ्कुमकान्तय: ।
कृष्णलीला जगु: प्रीत्या निष्ककण्ठ्य: सुवासस: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
बैलगाड़ियों पर सवार गोपियाँ बेहतरीन कपड़ों से सुसज्जित थीं और उनके शरीर, खास तौर पर उनके स्तन, ताजे कुंकुम पाउडर से अलंकृत थे। जब वे बैलगाड़ियों पर सवार हुईं, तो उन्होंने बड़े आनंद के साथ कृष्ण की लीलाओं का कीर्तन शुरू कर दिया।
 
The gopis riding on the bullock carts were decked in the finest clothes and their bodies, especially their breasts, were adorned with fresh kumkum powder. While riding on the carts, they began singing the praises of Krishna's pastimes in great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)