श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  10.11.31-32 
वृद्धान्बालान्स्त्रियो राजन्सर्वोपकरणानि च ।
अन:स्वारोप्य गोपाला यत्ता आत्तशरासना: ॥ ३१ ॥
गोधनानि पुरस्कृत्य श‍ृङ्गाण्यापूर्य सर्वत: ।
तूर्यघोषेण महता ययु: सहपुरोहिता: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
सारे बूढ़े, स्त्रियाँ, बच्चे और घरेलू सामान बैलगाड़ियों पर लादकर, और सारी गायों को आगे करके, ग्वालों ने सावधानी से अपने-अपने तीर-कमान उठाए और सींग से बने बिगुल बजाए। हे राजा परीक्षित, इस तरह चारों ओर बिगुल बज रहे थे तब ग्वालों ने अपने पुरोहितों के साथ अपनी यात्रा शुरू की।
 
सारे बूढ़े, स्त्रियाँ, बच्चे और घरेलू सामान बैलगाड़ियों पर लादकर, और सारी गायों को आगे करके, ग्वालों ने सावधानी से अपने-अपने तीर-कमान उठाए और सींग से बने बिगुल बजाए। हे राजा परीक्षित, इस तरह चारों ओर बिगुल बज रहे थे तब ग्वालों ने अपने पुरोहितों के साथ अपनी यात्रा शुरू की।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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