श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.11.3 
उलूखलं विकर्षन्तं दाम्ना बद्धं च बालकम् ।
कस्येदं कुत आश्चर्यमुत्पात इति कातरा: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण उस रस्सी से ओखली से बँधे हुए थे जिसे वे खींच रहे थे। परन्तु उन वृक्षों को गिराया किसने था? वास्तव में यह कार्य किसने किया था? इस घटना का उद्गम स्थान कहाँ था? ये चकित करने वाली बातें सोच-सोचकर सभी ग्वाले सशंकित और मोहित हो रहे थे।
 
कृष्ण उस रस्सी से ओखली से बँधे हुए थे जिसे वे खींच रहे थे। परन्तु उन वृक्षों को गिराया किसने था? वास्तव में यह कार्य किसने किया था? इस घटना का उद्गम स्थान कहाँ था? ये चकित करने वाली बातें सोच-सोचकर सभी ग्वाले सशंकित और मोहित हो रहे थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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