श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.11.23 
उत्थातव्यमितोऽस्माभिर्गोकुलस्य हितैषिभि: ।
आयान्त्यत्र महोत्पाता बालानां नाशहेतव: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
उसने कहा: मेरे प्यारे मित्र ग्वालों, इस गोकुल नामक स्थान की भलाई के लिए हमें इसे छोड़ देना चाहिए क्योंकि यहाँ पर राम और कृष्ण को मारने के उद्देश्य से हमेशा अनेक उपद्रव होते ही रहते हैं।
 
He said: My cowherd friends, for the welfare of this place called Gokul we must leave it because here many disturbances are always happening with the aim of killing Rama and Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)