श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.11.2 
भूम्यां निपतितौ तत्र दद‍ृशुर्यमलार्जुनौ ।
बभ्रमुस्तदविज्ञाय लक्ष्यं पतनकारणम् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
यमला-अर्जुन के वृक्षों को जमीन पर गिरा हुआ देखकर वे सब विस्मित और परेशान थे। वे साफ तौर पर देख पा रहे थे कि पेड़ गिर गए हैं, लेकिन वे यह पता नहीं लगा पा रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से पेड़ गिर गए। वे इस बात को समझ नहीं पा रहे थे कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ।
 
यमला-अर्जुन के वृक्षों को जमीन पर गिरा हुआ देखकर वे सब विस्मित और परेशान थे। वे साफ तौर पर देख पा रहे थे कि पेड़ गिर गए हैं, लेकिन वे यह पता नहीं लगा पा रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से पेड़ गिर गए। वे इस बात को समझ नहीं पा रहे थे कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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