श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.11.1 
श्रीशुक उवाच
गोपा नन्दादय: श्रुत्वा द्रुमयो: पततोरवम् ।
तत्राजग्मु: कुरुश्रेष्ठ निर्घातभयशङ्किता: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा, "हे महाराज परीक्षित, जब यमलार्जुन वृक्ष गिरा तो आसपास के सभी ग्वाले भयंकर ध्वनि सुनकर और आकाशीय बिजली गिरने के भय से घटनास्थल पर पहुँचे।"
 
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा, "हे महाराज परीक्षित, जब यमलार्जुन वृक्ष गिरा तो आसपास के सभी ग्वाले भयंकर ध्वनि सुनकर और आकाशीय बिजली गिरने के भय से घटनास्थल पर पहुँचे।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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