प्रिय शुकदेव गोस्वामी, आपने पहले ही समझा दिया है कि दूसरे चतुर्व्यूह में से संकर्षण रोहिणी के पुत्र बलराम के रूप में प्रगट हुए थे। अगर बलराम को एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित नहीं किया गया होता तो यह कैसे संभव हो पाता कि वे पहले देवकी के गर्भ में रहते और बाद में रोहिणी के गर्भ में? कृपया इसका वर्णन मुझसे करें।
O Sukadeva Goswami, you have already explained that Sankarshana belonging to the second Chaturvyuha appeared as Balarama, the son of Rohini. If Balarama had not been transferred from one body to another, how would it have been possible for him to be first in the womb of Devaki and then in the womb of Rohini? Please explain this to me.
तात्पर्य
यहाँ विशेष रूप से बलराम को समझने के लिए एक प्रश्न दिया गया है, जो साक्षात संकर्षण हैं। बलराम को रोहिणी के पुत्र के रूप में जाना जाता है, फिर भी यह भी ज्ञात है कि वह देवकी के पुत्र थे। परीक्षित महाराज बलराम के देवकी और रोहिणी दोनों के पुत्र होने के रहस्य को समझना चाहते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥