श्रीवसुदेव उवाच
श्लाघनीयगुण: शूरैर्भवान् भोजयशस्कर: ।
स कथं भगिनीं हन्यात् स्त्रियमुद्वाहपर्वणि ॥ ३७ ॥
अनुवाद
वसुदेव ने कहा: मेरे प्रिय साले कंस, तुम अपने भोज वंश का गौरव हो, और महान योद्धा तुम्हारे गुणों की प्रशंसा करते हैं। तुम्हारे जैसा योग्य व्यक्ति अपनी ही बहन को, वो भी ख़ासतौर पर उसके विवाह के अवसर पर, कैसे मार सकता है?
Vasudeva said: O brother-in-law, your Bhoja family is proud of you and great warriors praise your qualities. How can a capable person like you kill a woman who is his own sister, especially on the occasion of her marriage?
तात्पर्य
वैदिक सिद्धांतों के अनुसार, ब्राह्मण, बूढ़े व्यक्ति, स्त्री, बच्चे या गाय की किसी भी परिस्थिति में हत्या नहीं की जा सकती है। वासुदेव ने ज़ोर देकर कहा कि देवकी केवल एक महिला ही नहीं थी बल्कि कंस के परिवार की एक सदस्या भी थी। चूँकि अब उसका विवाह वासुदेव से हो चुका था, वह परस्त्री थी या दूसरे पुरुष की स्त्री, और यदि ऐसी स्त्री की हत्या की जाती, तो कंस को न केवल पापपूर्ण गतिविधियों में फंसाया जाएगा, बल्कि भोज वंश के शासक के रूप में उसकी प्रतिष्ठा भी धूमिल होगी। इसलिए वासुदेव ने कंस को मनाने के लिए कई तरह से प्रयास किया जिससे कि वह देवकी की हत्या करने से रुक जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥