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bhagavat 10.1.33: हे प्रिय पुत्र महाराज परीक्षित, जब दूल्हा और दुल्हन अपनी विदाई यात्रा आरंभ करने के लिए तैयार थे, तो उनकी मंगलमयी विदाई पर शंख, तुरही, मृदंग और नगाड़े एक साथ बजने लगे।   |   bhagavat अध्याय 10.1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.1.33 
शङ्खतूर्यमृदङ्गाश्च नेदुर्दुन्दुभय: समम् ।
प्रयाणप्रक्रमे तात वरवध्वो: सुमङ्गलम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय पुत्र महाराज परीक्षित, जब दूल्हा और दुल्हन अपनी विदाई यात्रा आरंभ करने के लिए तैयार थे, तो उनकी मंगलमयी विदाई पर शंख, तुरही, मृदंग और नगाड़े एक साथ बजने लगे।
 
O dear son of King Parikshit, when the bridegroom and bridegroom were about to depart, the conches, trumpets, drums and kettledrums were played together to mark their auspicious departure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)