श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.1.19 
ब्रह्मा तदुपधार्याथ सह देवैस्तया सह ।
जगाम सत्रिनयनस्तीरं क्षीरपयोनिधे: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
तदुपरांत पृथ्वी माता की विपदा को सुनकर ब्रह्माजी, माता पृथ्वी, शिवजी और अन्य समस्त देवताओं सहित क्षीरसागर के किनारे जा पहुँचे।
 
Hearing the plight of Mother Earth, Lord Brahma, along with Mother Earth, Lord Shiva and all the other gods, reached the banks of Kshirsagar.
तात्पर्य
पृथ्वी की कठोर दशा को समझने के बाद प्रभु ब्रह्मा ने सबसे पहले भगवान इंद्र व अन्य देवताओं के पास जाना उचित समझा, जो इस ब्रह्मांडीय व्यव्स्था में अनेक विभागों के निदेशक हैं, तथा भगवान शिव के पास जाना उचित समझा, जो संहार के लिए उत्तरदायी हैं। परमात्मा भगवान की आज्ञा अनुसार सृष्टि और संहार अविरत रूप से होते रहते हैं। जैसा कि भगवद्गीता (4.8) में वर्णित है, "परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्"| जो लोग ईश्वरीय कानूनों के प्रति आज्ञाकारी हैं, उन्हें ईश्वर के अनेक सेवक और देवता सुरक्षा प्रदान करते हैं जबकि जो लोग अधर्मी हैं, उनका विनाश भगवान शिव करते हैं। प्रभु ब्रह्मा सबसे पहले भगवान शिव सहित सभी देवताओं से मिले। फिर, माता पृथ्वी सहित, वे समुद्र के उस तट पर गए जहां भगवान विष्णु श्वेतद्वीप नामक एक श्वेत द्वीप पर विश्राम करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)