श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.8.51 
स्त्रीणां मद्धतबन्धूनां द्रोहो योऽसाविहोत्थित: ।
कर्मभिर्गृहमेधीयैर्नाहं कल्पो व्यपोहितुम् ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
मैंने बहुत सारी महिलाओं के दोस्तों और रिश्तेदारों को मरवा दिया है और इस तरह से मैंने इतनी दुश्मनी मोल ले ली है कि इसे अच्छे कामों या भौतिक कल्याण-कार्य के ज़रिए भी नहीं मिटाया जा सकता।
 
I have killed the relatives of many women and have thereby incurred enmity to an extent that it is not possible to wipe it off by material welfare work.
तात्पर्य
गृहस्थ वे हैं जिनका एकमात्र व्यवसाय भौतिक समृद्धि के लिए कल्याणकारी कार्य करना है। इस तरह की भौतिक समृद्धि कभी-कभी पापपूर्ण गतिविधियों से बाधित होती है, क्योंकि भौतिकवादी भौतिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान अनजाने में भी पाप करने के लिए निश्चित हैं। ऐसी पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से राहत पाने के लिए वेद कई तरह के यज्ञों को निर्धारित करते हैं। वेदों में कहा गया है कि अश्वमेध-यज्ञ (घोड़े की बलि) करने से ब्रह्महत्या (ब्राह्मण की हत्या) से भी मुक्ति मिल सकती है।

युधिष्ठिर महाराज ने यह अश्वमेध-यज्ञ किया, लेकिन उनका मानना ​​है कि इस तरह के यज्ञ करने से भी किए गए बड़े पापों से मुक्ति नहीं मिल सकती। युद्ध में या तो पति या भाई या यहाँ तक कि पिता या पुत्र लड़ने जाते हैं। और जब वे मारे जाते हैं, तो एक नई शत्रुता पैदा होती है, और इस तरह क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं की एक श्रृंखला बढ़ती जाती है जिसका हजारों अश्वमेध-यज्ञों से भी प्रतिकार करना संभव नहीं है।

कर्म का मार्ग (कर्म) वैसा ही है। यह एक क्रिया और दूसरी प्रतिक्रिया एक साथ पैदा करता है और इस प्रकार भौतिक गतिविधियों की श्रृंखला को बढ़ाता है, जो कर्ता को भौतिक बंधन में बाँधता है। भगवद्-गीता (9.27-28) में उपाय सुझाया गया है कि कार्य के मार्ग की ऐसी क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं को तभी रोका जा सकता है जब सर्वोच्च भगवान की ओर से कार्य किया जाए। कुरुक्षेत्र का युद्ध वास्तव में भगवान श्री कृष्ण की इच्छा से लड़ा गया था, जैसा कि उनके संस्करण से स्पष्ट है, और केवल उनकी इच्छा से युधिष्ठिर को हस्तिनापुर के सिंहासन पर बैठाया गया था। इसलिए, वास्तव में पांडवों को कोई भी पाप नहीं छुआ, जो केवल भगवान के आदेश वाहक थे। दूसरों के लिए, जो व्यक्तिगत स्वार्थ से युद्ध की घोषणा करते हैं, पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर होती है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)