मन्ये त्वां कालमीशानमनादिनिधनं विभुम् ।
समं चरन्तं सर्वत्र भूतानां यन्मिथ: कलि: ॥ २८ ॥
अनुवाद
हे प्रभु, मेरा मानना है कि आप सनातन समय हैं, परम नियंत्रक हैं, जिसका कोई आरंभ और अंत नहीं है, जो सर्वव्यापी हैं। आप अपनी दया सभी पर समान रूप से बरसाते हैं। जीवों में जो पारस्परिक कलह है, वह सामाजिक मतभेदों के कारण है।
O Lord, I consider you to be the eternal time, the supreme controller, without beginning or end and omnipresent. You show mercy to all equally. The mutual conflicts among living beings are due to social differences.
तात्पर्य
कुंतीदेवी जानती थीं कि कृष्ण न तो उनके भतीजे थे न ही उनके पैतृक घर के एक साधारण परिवार के सदस्य थे। वह अच्छी तरह जानती थीं कि कृष्ण ही आदिम भगवान हैं जो परमात्मा के रूप में हर किसी के दिल में रहते हैं। भगवान के परमात्मा गुण का दूसरा नाम काल या अनंत समय है। अनंत समय हमारे सभी कर्मों का गवाह है, अच्छे और बुरे, और इस तरह परिणामी प्रतिक्रियाएँ उसके द्वारा नियत की जाती हैं। यह कहने का कोई फायदा नहीं है कि हम नहीं जानते कि हम क्यों और किस लिए पीड़ित हैं। हम उस दुष्कर्म को भूल सकते हैं जिसके लिए हम इस समय पीड़ित हो सकते हैं, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि परमात्मा हमारे निरंतर साथी हैं, और इसलिए वह सब कुछ जानते हैं, अतीत, वर्तमान और भविष्य। और क्योंकि भगवान कृष्ण का परमात्मा वैशिष्ट्य सभी कर्मों और प्रतिक्रियाओं को नियत करता है, वह सर्वोच्च नियंत्रक भी है। उनकी स्वीकृति के बिना घास का एक ब्लेड भी नहीं चल सकता। जीवों को उतनी ही स्वतंत्रता दी जाती है जितनी वे पात्र होते हैं, और उस स्वतंत्रता का दुरुपयोग दुख का कारण होता है। भगवान के भक्त अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करते हैं, और इसलिए वे भगवान के अच्छे पुत्र हैं। अन्य, जो स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हैं, उन्हें अनंत काल द्वारा नियत दुखों में डाल दिया जाता है। काल सशर्त आत्माओं को सुख और दुख दोनों प्रदान करता है। यह सब अनंत काल द्वारा पूर्व निर्धारित है। जैसे हमारे पास बिना मांगे-अपने आप में दुख हैं, वैसे ही बिना मांगे हमारे पास सुख भी हो सकता है, क्योंकि ये सभी काल द्वारा पूर्व निर्धारित हैं। इसलिए कोई भी भगवान का न तो शत्रु है और न ही मित्र। हर कोई अपने भाग्य के परिणाम का आनंद ले रहा है और भुगत रहा है। यह भाग्य सामाजिक अंतःक्रिया के दौरान जीवित प्राणियों द्वारा बनाया जाता है। यहाँ हर कोई भौतिक प्रकृति पर प्रभुत्व जमाना चाहता है, और इस प्रकार हर कोई सर्वोच्च भगवान की देखरेख में अपनी स्वयं की नियति बनाता है। वह सर्व-व्यापी हैं और इसलिए वह सभी की गतिविधियों को देख सकते हैं। और क्योंकि भगवान की कोई शुरुआत या अंत नहीं है, इसलिए उन्हें अनंत काल, काल के रूप में भी जाना जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥