जन्मैश्वर्यश्रुतश्रीभिरेधमानमद: पुमान् ।
नैवार्हत्यभिधातुं वै त्वामकिञ्चनगोचरम् ॥ २६ ॥
अनुवाद
हे प्रभु, आप सरलता से प्राप्त होने वाले हैं, पर केवल उनके द्वारा ही जिन्होंने लौकिक पदार्थों से छुटकारा पा लिया है। जो सम्मानित वंश, ऐश्वर्य, उच्च शिक्षा और शारीरिक सौंदर्य से भौतिक उन्नति के मार्ग पर चलकर आत्म-सुधार का प्रयास करते हैं, वे अद्वैत भाव से आप तक नहीं पहुँच पाते।
O Lord, You are easily attainable, but only by those who are materially poor. One who strives to advance on the path of material progress by means of respectable family, wealth, higher education and physical beauty cannot reach You with single-minded devotion.
तात्पर्य
भौतिक रूप से उन्नत होने का अर्थ है किसी अभिजात्य परिवार में जन्म लेना और प्रचुर संपत्ति, शिक्षा और आकर्षक व्यक्तिगत सौंदर्य रखना। सभी भौतिकवादी पुरुष इन सभी भौतिक ओपुलेंस को हासिल करने के पागल रहते हैं और यह भौतिक सभ्यता की उन्नति के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसका परिणाम यह होता है कि इन सभी भौतिक संपत्तियों को प्राप्त करने के बाद व्यक्ति कृत्रिम रूप से ऊपर उठ जाता है, ऐसी अस्थायी संपत्तियों से नशा हो जाता है। नतीजतन, ऐसे भौतिक रूप से ऊपर उठे हुए व्यक्ति प्रभु के पवित्र नाम का उच्चारण करने में असमर्थ होते हैं, उन्हें भावनापूर्वक संबोधित करते हुए, "हे गोविंद, हे कृष्ण।" शास्त्रों में कहा गया है कि एक बार प्रभु के पवित्र नाम का उच्चारण करने से, पापी उन पापों की मात्रा से छुटकारा पा जाता है जो वह करने में असमर्थ है। प्रभु के पवित्र नाम के उच्चारण की ऐसी शक्ति है। इस कथन में जरा भी अतिशयोक्ति नहीं है। वास्तव में प्रभु के पवित्र नाम में इतनी शक्तिशाली क्षमता है। लेकिन इस तरह के उच्चारणों में भी एक गुण होता है। यह भावना की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। एक असहाय व्यक्ति प्रभु के पवित्र नाम का भावपूर्वक उच्चारण कर सकता है, जबकि एक व्यक्ति जो बहुत भौतिक संतुष्टि में वही पवित्र नाम का उच्चारण करता है, वह इतना ईमानदार नहीं हो सकता। भौतिक रूप से ऊपर उठा हुआ व्यक्ति कभी-कभी प्रभु के पवित्र नाम का उच्चारण कर सकता है, लेकिन वह नाम को गुणवत्ता में उच्चारण करने में असमर्थ होता है। इसलिए, भौतिक उन्नति के चार सिद्धांत, अर्थात् (1) उच्च माता-पिता, (2) अच्छी संपत्ति, (3) उच्च शिक्षा और (4) आकर्षक सौंदर्य, आध्यात्मिक उन्नति के पथ पर प्रगति के लिए अयोग्यताएं हैं। शुद्ध आध्यात्मिक आत्मा का भौतिक आवरण एक बाहरी विशेषता है, जितना कि बुखार अस्वस्थ शरीर की एक बाहरी विशेषता है। सामान्य प्रक्रिया बुखार की डिग्री को कम करना है और कुपोषण द्वारा इसे बढ़ाना नहीं है। कभी-कभी यह देखा जाता है कि आध्यात्मिक रूप से उन्नत व्यक्ति भौतिक रूप से गरीब हो जाते हैं। यह कोई निराशा नहीं है। दूसरी ओर, ऐसी दरिद्रता उतनी ही अच्छी निशानी है जितनी तापमान में गिरावट एक अच्छी निशानी है। जीवन का सिद्धांत भौतिक नशे की डिग्री को कम करना होना चाहिए जो व्यक्ति को जीवन के उद्देश्य के बारे में अधिक से अधिक भ्रम की ओर ले जाता है। बहुत अधिक भ्रमित व्यक्ति ईश्वर के राज्य में प्रवेश के लिए बिल्कुल अयोग्य हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥