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bhagavat 1.7.57: उसके सिर के बाल काटना, उसे उसकी संपत्ति से वंचित करना और उसे घर से भगा देना - ये ब्राह्मण के रिश्तेदारों के लिए निर्धारित दंड हैं। शरीर को मार डालने का कोई आदेश नहीं है।   |   bhagavat अध्याय 1.7: द्रोण-पुत्र को दण्ड   ।   bhagavat स्कन्ध 1: सृष्टि   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 7: द्रोण-पुत्र को दण्ड  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.7.57 
वपनं द्रविणादानं स्थानान्निर्यापणं तथा ।
एष हि ब्रह्मबन्धूनां वधो नान्योऽस्ति दैहिक: ॥ ५७ ॥
 
 
अनुवाद
उसके सिर के बाल काटना, उसे उसकी संपत्ति से वंचित करना और उसे घर से भगा देना - ये ब्राह्मण के रिश्तेदारों के लिए निर्धारित दंड हैं। शरीर को मार डालने का कोई आदेश नहीं है।
 
Shaving off his head, depriving him of wealth and driving him out of the house-these are the punishments prescribed for a brahmabandhu. There is no provision for physical killing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)