तभी अर्जुन भगवान की द्विअर्थी आज्ञाओं का आशय समझ गया और उसने अपने तलवार से अश्वत्थामा के सिर के केश और मणि दोनों को काट दिया।
At that very moment Arjuna understood the purpose of the Lord's numerous commands and thus with his sword he severed both the hair and the gem from Ashvatthama's head.
तात्पर्य
विभिन्न व्यक्तियों के विपरीत आदेशों का पालन करना असंभव है। इसलिए अर्जुन ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से एक समझौता चुना और अश्वत्थामा के सिर से रत्न को अलग कर दिया। यह उसके सिर को काटने के समान था, और फिर भी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए उसकी जान बच गई। यहां अश्वत्थामा को द्विजात के रूप में दर्शाया गया है। निश्चित रूप से वह द्विजात था, परन्तु वह अपनी स्थिति से गिर गया, और इसलिए उसे उचित दंड दिया गया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥