धर्म के सिद्धान्तों को जानने वाला व्यक्ति ऐसे शत्रु का वध नहीं करता जो असावधान, मादक द्रव्यो के सेवन से उन्मत्त, पागल, सो रहा हो, भयभीत हो या जिसका रथ नष्ट हो गया हो। वह किसी बालक, स्त्री, मूर्ख प्राणी या आत्मसमर्पण करने वाले प्राणी का भी वध नहीं करता है।
A man who knows the principles of religion does not kill an enemy who is careless, inebriated, insane, asleep, frightened or without a chariot. Nor does he kill a child, a woman, a foolish person or a person who has sought refuge.
तात्पर्य
कोई भी योद्धा जो धर्म के सिद्धांतों को समझता है, कभी भी किसी ऐसे शत्रु को नहीं मारता जो विरोध नहीं करता है। पहले धर्म के सिद्धांतों पर युद्ध लड़े जाते थे न कि भोग-विलास के लिए। यदि शत्रु नशे में धुत हो, सोया हुआ हो, आदि, जैसा कि ऊपर वर्णित है, तो उसे कभी नहीं मारा जाता था। ये धार्मिक युद्ध के कुछ नियम हैं। पहले युद्ध कभी भी स्वार्थी राजनीतिक नेताओं की सनकों से घोषित नहीं किए जाते थे; इसे धर्म के सिद्धांतों पर बिना किसी दुर्गुण के किया जाता था। धार्मिक सिद्धांतों पर किया गया हिंसा तथाकथित अहिंसा से कहीं श्रेष्ठ है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥