ताँबे के दो लाल गोलों के समान क्रोध से रक्तवर्ण हो रही आँखों वाले अर्जुन ने अत्यन्त कुशलता से गौतमी के पुत्र को पकड़ लिया और उसे पशु के समान रस्सियों से बाँध दिया।
With his eyes blazing with anger like two red-hot balls of copper, Arjuna very skillfully captured Gautami's son and tied him with ropes like an animal.
तात्पर्य
अश्वत्थामा की माता कृपी का जन्म गौतम के परिवार में हुआ था। इस श्लोक का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि अश्वत्थामा को जानवर की तरह रस्सियों से पकड़कर बाँधा गया था। श्रीधर स्वामी के अनुसार, अर्जुन एक ब्राह्मण के इस पुत्र को अपने कर्तव्य (धर्म) के एक भाग के रूप में एक जानवर की तरह पकड़ने के लिए बाध्य था। श्रीधर स्वामी का यह सुझाव श्री कृष्ण के बाद के कथन में भी पुष्टि की गई है। अश्वत्थामा द्रोणाचार्य और कृपी का एक वास्तविक पुत्र था, लेकिन क्योंकि उसने खुद को जीवन की निम्न स्थिति में गिरा लिया था, इसलिए उसके साथ एक जानवर के रूप में व्यवहार करना उचित था न कि एक ब्राह्मण के रूप में।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥