श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 7: द्रोण-पुत्र को दण्ड  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.7.22 
अर्जुन उवाच
कृष्ण कृष्ण महाबाहो भक्तानामभयङ्कर ।
त्वमेको दह्यमानानामपवर्गोऽसि संसृते: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले: हे भगवान श्रीकृष्ण, आप सर्वशक्तिमान परमात्मा हैं। आपकी विभिन्न शक्तियों का कोई अंत नहीं है। इसलिए केवल आप ही अपने भक्तों के हृदयों में निडरता उत्पन्न करने में सक्षम हैं। भौतिक दुखों की आग में जले हुए सभी लोग केवल आपमें ही मोक्ष का रास्ता पा सकते हैं।
 
Arjuna said: O Lord Sri Krishna, You are the Almighty Supreme Lord. There is no limit to Your various powers. Therefore You alone are capable of instilling fearlessness in the hearts of Your devotees. All those who are trapped in the flames of material suffering can find the path to salvation only in You.
तात्पर्य
अर्जुन भगवान श्री कृष्ण के अलौकिक गुणों से अवगत थे, क्योंकि वह पहले ही कुरुक्षेत्र वार में उनका अनुभव कर चुके थे, जिसमें वे दोनों उपस्थित थे। इसलिए, अर्जुन का भगवान कृष्ण का संस्करण आधिकारिक है। कृष्ण सर्वशक्तिमान हैं और विशेष रूप से भक्तों के लिए निडरता का कारण हैं। प्रभु का भक्त सदैव निडर होता है क्योंकि उसे प्रभु द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है। भौतिक अस्तित्व वन में जलती हुई आग की तरह है, जिसे भगवान श्री कृष्ण की कृपा से बुझाया जा सकता है। आध्यात्मिक गुरु प्रभु के कृपा प्रतिनिधि हैं। इसलिए, भौतिक अस्तित्व की लपटों में जलने वाला व्यक्ति आत्म-साक्षात्कृत आध्यात्मिक गुरु के पारदर्शी माध्यम से प्रभु की कृपा की वर्षा प्राप्त कर सकता है। आध्यात्मिक गुरु, अपने शब्दों से, पीड़ित व्यक्ति के हृदय में प्रवेश कर सकते हैं और अलौकिक ज्ञान का संचार कर सकते हैं, जो अकेला ही भौतिक अस्तित्व की आग को बुझा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)