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bhagavat 1.7.15: पाँच पाण्डवों की माता द्रौपदी अपने पुत्रों के वध के समाचार सुनकर आँसुओं से भरी आँखों से विलाप करने लगी। अर्जुन ने अपनी माँ को इस विषम घड़ी में ढाढ़स बँधाते हुए कहा:   |   bhagavat अध्याय 1.7: द्रोण-पुत्र को दण्ड   ।   bhagavat स्कन्ध 1: सृष्टि   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 7: द्रोण-पुत्र को दण्ड  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.7.15 
माता शिशूनां निधनं सुतानां
निशम्य घोरं परितप्यमाना ।
तदारुदद्वाष्पकलाकुलाक्षी
तां सान्‍त्वयन्नाह किरीटमाली ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
पाँच पाण्डवों की माता द्रौपदी अपने पुत्रों के वध के समाचार सुनकर आँसुओं से भरी आँखों से विलाप करने लगी। अर्जुन ने अपनी माँ को इस विषम घड़ी में ढाढ़स बँधाते हुए कहा:
 
Draupadi, the mother of the five sons of the Pandavas, on hearing of the killing of her sons, began to lament with grief, with eyes brimming with tears. To comfort her in this great loss, Arjuna spoke to her thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)