एकदा निर्गतां गेहाद्दुहन्तीं निशि गां पथि ।
सर्पोऽदशत्पदा स्पृष्ट: कृपणां कालचोदित: ॥ ९ ॥
अनुवाद
एक बार की बात है, मेरी माँ बेचारी एक रात गाय को दुहने जा रही थी, तभी परम काल के प्रेरित एक सांप ने मेरी माँ के पाँव में डस लिया।
Once when my poor mother was going to milk the cow at night, a serpent, inspired by the supreme time, bit my mother's foot.
तात्पर्य
वही ईमानदार आत्माओं को ईश्वर के और समीप खींचने का तरीका होता है। उस गरीब बालक का लालन-पालन सिर्फ़ उसकी प्यारी माँ ही कर रही थी और फिर भी उस माँ को प्रभु ने संसार से इसलिए उठा लिया कि वह पूरी तरह से प्रभु की कृपा पर निर्भर हो जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥