वेदांत-दर्शन के संकलनकर्ता स्वयं व्यासदेव हैं। फिर भी वह परेशान हैं, हालांकि वह लेखक हैं। तो वेदांत के पाठकों और श्रोताओं को किस प्रकार का पारलौकिक आनंद प्राप्त हो सकता है जो सीधे व्यासदेव, लेखक द्वारा वर्णित नहीं है? यहाँ पर उसी लेखक द्वारा श्रीमद्-भागवतम के रूप में वेदांत-सूत्र को समझाने की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
