श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 5: नारद द्वारा व्यासदेव को श्रीमद्भागवत के विषय में आदेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.5.31 
येनैवाहं भगवतो वासुदेवस्य वेधस: ।
मायानुभावमविदं येन गच्छन्ति तत्पदम् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
उस गुह्य ज्ञान से, मैं सम्पूर्ण जगत के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता भगवान् श्री कृष्ण की शक्ति के प्रभाव को ठीक-ठीक समझ सका। इसे जान लेने के बाद, कोई भी व्यक्ति उनके पास लौटकर उनसे साक्षात् मिल सकता है।
 
With that secret knowledge, I could understand the power of Lord Krishna, the creator, preserver and destroyer of all things. After knowing it, any human being can go back to Him and meet Him personally.
तात्पर्य
भक्ति सेवा या अति गोपनीय ज्ञान से, कोई भी बहुत आसानी से समझ सकता है कि प्रभु की अलग-अलग ऊर्जाएं किस प्रकार कार्य कर रही हैं। उनकी ऊर्जा का एक भाग भौतिक संसार को प्रकट कर रहा है; उनकी ऊर्जा का दूसरा (श्रेष्ठ) भाग आध्यात्मिक संसार को प्रकट कर रहा है। और उनकी मध्यवर्ती ऊर्जा उन जीवों को प्रकट कर रही है जो उपर्युक्त दोनों प्रकार की ऊर्जाओं में से किसी एक की सेवा कर रहे हैं। भौतिक ऊर्जा की सेवा करने वाले जीव अस्तित्व और खुशी के लिए कठिन संघर्ष कर रहे हैं, जो उन्हें माया के रूप में प्रस्तुत की जाती है। लेकिन आध्यात्मिक ऊर्जा वाले जीव शाश्वत जीवन, पूर्ण ज्ञान और निरंतर आनंद में प्रभु की प्रत्यक्ष सेवा में रखे गए हैं। भगवद गीता में जैसा उन्होंने सीधे कहा है प्रभु की इच्छा है कि, भौतिक ऊर्जा के राज्य में सड़ रही सभी बद्ध आत्माएं, भौतिक संसार में सभी जुड़ावों को त्यागकर उनके पास वापस आएं। यह ज्ञान का सबसे गोपनीय भाग है। लेकिन इसे केवल शुद्ध भक्त ही समझ सकते हैं, और केवल ऐसे भक्त ही ईश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं ताकि उन्हें व्यक्तिगत रूप से देखें और व्यक्तिगत रूप से उनकी सेवा करें। इसका ठोस उदाहरण स्वयं नारद हैं, जिन्होंने अनन्त ज्ञान और अनन्त आनंद की इस अवस्था को प्राप्त किया। और मार्ग और साधन सभी के लिए खुले हैं, बशर्ते कोई श्री नारद मुनि के पदचिह्नों पर चलने के लिए सहमत हो। श्रुति के अनुसार, सर्वोच्च प्रभु की असीमित ऊर्जाएँ हैं (उनके द्वारा बिना प्रयास के), और इनका वर्णन, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, तीन प्रमुख शीर्षकों के अंतर्गत किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)