श्रीमद्भागवतम सर्वोच्च धार्मिक ज्ञान है, और इसलिए यह आम लोगों पर औषधीय剂 की तरह असर कर सकता है। क्योंकि इसमें परमात्मा की दिव्य लीलाएँ हैं, इसलिए परमात्मा और साहित्य के बीच कोई अंतर नहीं है। साहित्य परमात्मा का वास्तविक साहित्यिक अवतार है। इसलिए आम आदमी परमात्मा के कार्यों का वर्णन सुन सकते हैं। इस तरह से वे परमात्मा के साथ जुड़ने में सक्षम होते हैं और इस प्रकार धीरे-धीरे भौतिक रोगों से मुक्त हो जाते हैं। विशेषज्ञ भक्त भी कुछ समय और परिस्थितियों के हिसाब से, भक्तों को बदलने के लिए उपन्यास तरीके और उपाय खोज सकते हैं। भक्ति सेवा एक गतिशील गतिविधि है, और विशेषज्ञ भक्त भौतिकवादी लोगों के मंद मस्तिष्क में इसे डालने के लिए सक्षम माध्यम ढूंढ सकते हैं। परमात्मा की सेवा के लिए भक्तों की ऐसी आध्यात्मिक गतिविधियाँ भौतिकवादी लोगों के मूर्ख समाज में जीवन की एक नई व्यवस्था ला सकती हैं। भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके बाद के अनुयायियों ने इस संबंध में विशेष निपुणता दिखाई है। उसी पद्धति का पालन करके, कोई इस कलह के युग के भौतिकवादी लोगों को शांतिपूर्ण जीवन और दिव्य साक्षात्कार के लिए क्रम में ला सकता है।
