अभिमन्युसुतं सूत प्राहुर्भागवतोत्तमम् ।
तस्य जन्म महाश्चर्यं कर्माणि च गृणीहि न: ॥ ९ ॥
अनुवाद
ऐसा कहा जाता है कि महाराज परीक्षित परम भक्त थे और उनका जन्म व कर्म बहुत ही विलक्षण थे। कृपया उनके बारे में हमे बताएं।
It is said that Maharaja Pariksit was a great devotee of the Lord and his birth and deeds were very wonderful. Please tell us about him.
तात्पर्य
महाराज परीक्षित का जन्म अद्भुत है क्योंकि अपनी माता के गर्भ में ही उन्हें भगवान श्री कृष्ण ने अपनी सुरक्षा में रखा था। उनके कार्य भी अद्भुत हैं क्योंकि उन्होंने कलियुग को दंडित किया जिसने एक गाय को मारने का प्रयास किया था। गाय को मारना मानव सभ्यता को समाप्त करना है। वह गाय को पाप के प्रधान प्रतिनिधि द्वारा मारे जाने से बचाना चाहते थें। उनकी मृत्यु भी अद्भुत थी क्योंकि उन्हें अपनी मृत्यु का पूर्व सूचना मिली जो किसी भी मृत्यु प्राणी के लिए अद्भुत है, और इस तरह उन्होंने गंगा के तट पर बैठकर भगवान की दिव्य लीलाओं को सुनकर अपने शरीर को त्यागने की तैयारी की। उन सभी दिनों में, जब उन्होंने भगवतम् सुना, उन्होंने न तो खाना लिया और न ही पानी पिया, और न ही उन्हें एक पल के लिए नींद आई। इसलिए उनके बारे में सब कुछ अद्भुत है, और उनकी गतिविधियाँ ध्यान से सुनने योग्य हैं। यहाँ यह इच्छा व्यक्त की गई है कि उनके बारे में विस्तार से सुना जा सके।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥