महान ऋषि व्यासदेव अपने आध्यात्मिक दर्शन द्वारा यह सब देख सकते थे। जैसे एक ज्योतिषी किसी व्यक्ति के भविष्य के भाग्य को देख सकता है, या एक खगोलशास्त्री सूर्य और चंद्र ग्रहणों की भविष्यवाणी कर सकता है, वैसे ही वो मुक्त आत्माएँ जो धर्मग्रंथों को गहराई से जानती हैं वे पूरी मानव जाति के भविष्य की भविष्यवाणी कर सकती हैं। वे अपनी आध्यात्मिक प्राप्ति की पैनी दृष्टि से यह कर सकते हैं।
और ऐसे सभी आध्यात्मिकवादी, जो स्वाभाविक रूप से भगवान के भक्त होते हैं, हमेशा आम लोगों के कल्याण की सेवा के लिए उत्सुक रहते हैं। वे आम लोगों के असली दोस्त होते हैं, न कि तथाकथित जननेता जो यह नहीं देख पाते कि पाँच मिनट बाद क्या होने जा रहा है। इस युग में आम लोग और साथ ही उनके तथाकथित जननेता सभी बदकिस्मत हैं, वे आध्यात्मिक ज्ञान में विश्वास नहीं रखते और कलियुग से प्रभावित हैं। वे हमेशा विभिन्न रोगों से परेशान रहते हैं। उदाहरण के लिए, वर्तमान युग में टीबी के इतने सारे रोगी और टीबी अस्पताल हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं था क्योंकि समय इतना प्रतिकूल नहीं था। इस युग के दुर्भाग्यशाली लोग हमेशा उन आध्यात्मिकवादियों का स्वागत करने में अनिच्छुक रहते हैं जो श्रील व्यासदेव के प्रतिनिधि हैं और निःस्वार्थ कार्यकर्ता हैं जो हमेशा कुछ ऐसा करने की योजना बनाने में व्यस्त रहते हैं जिससे जीवन के सभी स्तरों और व्यवस्थाओं में सभी की मदद हो सके। सबसे बड़े परोपकारी वे आध्यात्मिकवादी हैं जो व्यास, नारद, माधव, चैतन्य, रूप, सरस्वती आदि के मिशन का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे सभी एक ही हैं। व्यक्तित्व भिन्न हो सकते हैं, लेकिन मिशन का उद्देश्य एक ही है, अर्थात, गिरी हुई आत्माओं को घर वापस, भगवान के पास पहुँचाना।
