सूत गोस्वामी उवाच: जब द्वापर युग और त्रेता युग का अतिव्यापन हो रहा था, तो उस समय वसु की पुत्री सत्यवती के गर्भ से महर्षि पराशर के द्वारा महान ऋषि व्यासदेव का जन्म हुआ।
Suta Goswami said: At the time when Dvapara Yuga was overlapping with Treta Yuga, the great sage (Vyasadeva) was born from the womb of Satyavati, the daughter of Vasu, by Parashara.
तात्पर्य
चारों युगों, सत्य, द्वापर, त्रेता और कलि का एक कालक्रम है। लेकिन कभी-कभी ओवरलैपिंग होती है। वैवस्वत मनु के शासन के दौरान, चारों युग के अट्ठाईसवें चक्र का ओवरलैपिंग था और दूसरी सहस्राब्दी से पहले तीसरी सहस्राब्दी दिखाई दी। उस विशेष सहस्राब्दी में, भगवान श्री कृष्ण भी अवतरित होते हैं, और इस कारण से कुछ विशेष परिवर्तन हुआ था। महान ऋषि की माँ सात्यवती, वसु (मछुआरे) की बेटी थीं और पिता महान पराशर मुनि थे। यही व्यासदेव के जन्म का इतिहास है। हर सहस्राब्दी को तीन अवधियों में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक अवधि को संध्या कहा जाता है। व्यासदेव उस विशेष युग की तीसरी संध्या में प्रकट हुए थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥