श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.3.7 
द्वितीयं तु भवायास्य रसातलगतां महीम् ।
उद्धरिष्यन्नुपादत्त यज्ञेश: सौकरं वपु: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
समस्त यज्ञों के मुख्य लाभार्थी ने शूकर का अवतार (दूसरा अवतार) लिया और धरती के भले के लिए उसे ब्रह्मांड के निचले क्षेत्र से ऊपर उठाया।
 
समस्त यज्ञों के मुख्य लाभार्थी ने शूकर का अवतार (दूसरा अवतार) लिया और धरती के भले के लिए उसे ब्रह्मांड के निचले क्षेत्र से ऊपर उठाया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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