स एव प्रथमं देव: कौमारं सर्गमाश्रित: ।
चचार दुश्चरं ब्रह्मा ब्रह्मचर्यमखण्डितम् ॥ ६ ॥
अनुवाद
सृष्टि के आरंभ में सर्वप्रथम ब्रह्मा के चार अविवाहित पुत्र (कुमारगण) थे, जो ब्रह्मचर्य व्रत धारण करके परम सत्य को जानने के लिए कठोर तपस्या करते थे।
In the beginning of creation, Brahma had four unmarried sons (Kumars), who followed the vow of celibacy and performed rigorous penance to realize the ultimate truth.
तात्पर्य
भौतिक विश्व का प्रकटीकरण, पालन और फिर निश्चित अंतराल पर उसका पुनः विनाश होता रहता है। इसलिए, सृष्टि में जीवों के पिता ब्रह्मा के विशेष प्रकारों के संदर्भ में सृष्टियों के अलग-अलग नाम हैं। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, कुमार भौतिक दुनिया के कौमार सृजन में प्रकट हुए और हमें ब्रह्म साक्षात्कार की प्रक्रिया सिखाने के लिए उन्होंने ब्रह्मचारियों के रूप में कठोरतापूर्ण अनुशासनात्मक जीवन जिया। ये कुमार सशक्त अवतार हैं। और अनुशासन की कठोर कार्रवाई करने से पहले, वे सभी योग्य ब्राह्मण बन गए। यह उदाहरण बताता है कि पहले व्यक्ति को ब्राह्मण की योग्यता प्राप्त करनी चाहिए, न केवल जन्म से बल्कि गुणवत्ता से भी, और फिर व्यक्ति ब्रह्म साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥