श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.3.43 
कृष्णे स्वधामोपगते धर्मज्ञानादिभि: सह ।
कलौ नष्टद‍ृशामेष पुराणार्कोऽधुनोदित: ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
यह भागवत पुराण सूर्य के समान तेजस्वी है और यह भगवान कृष्ण के अपने धाम जाने के बाद ही प्रकट हुआ, जो धर्म, ज्ञान आदि के साथ गए थे। जिन लोगों ने कलियुग की घोर अज्ञानता के कारण अपनी दृष्टि खो दी है, उन्हें इस पुराण से प्रकाश मिलेगा।
 
यह भागवत पुराण सूर्य के समान तेजस्वी है और यह भगवान कृष्ण के अपने धाम जाने के बाद ही प्रकट हुआ, जो धर्म, ज्ञान आदि के साथ गए थे। जिन लोगों ने कलियुग की घोर अज्ञानता के कारण अपनी दृष्टि खो दी है, उन्हें इस पुराण से प्रकाश मिलेगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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