श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.3.42 
स तु संश्रावयामास महाराजं परीक्षितम् ।
प्रायोपविष्टं गङ्गायां परीतं परमर्षिभि: ॥ ४२ ॥
 
 
अनुवाद
अपनी बारी में, व्यासदेव के पुत्र शुकदेव गोस्वामी ने, भागवत को महाराज परीक्षित को सुनाया, जो उस समय निराहार और निर्जल होकर मृत्यु की प्रतीक्षा में थे और ऋषिगणों से घिरे गंगा नदी के किनारे बैठे थे।
 
अपनी बारी में, व्यासदेव के पुत्र शुकदेव गोस्वामी ने, भागवत को महाराज परीक्षित को सुनाया, जो उस समय निराहार और निर्जल होकर मृत्यु की प्रतीक्षा में थे और ऋषिगणों से घिरे गंगा नदी के किनारे बैठे थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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