श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.3.41 
तदिदं ग्राहयामास सुतमात्मवतां वरम् ।
सर्ववेदेतिहासानां सारं सारं समुद्‍धृतम् ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
स्वरूपसिद्धों में अत्यंत सम्मानीय श्री व्यासदेव ने समस्त वैदिक साहित्य और ब्रह्मांड के इतिहासों का सार निकालकर इसे अपने पुत्र को प्रदान किया।
 
स्वरूपसिद्धों में अत्यंत सम्मानीय श्री व्यासदेव ने समस्त वैदिक साहित्य और ब्रह्मांड के इतिहासों का सार निकालकर इसे अपने पुत्र को प्रदान किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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