श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.3.37 
न चास्य कश्चिन्निपुणेन धातु-
रवैति जन्तु: कुमनीष ऊती: ।
नामानि रूपाणि मनोवचोभि:
सन्तन्वतो नटचर्यामिवाज्ञ: ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
अल्प ज्ञान वाले मूर्ख मनुष्य, किसी नाटक में पात्र की भांति अभिनय करने वाले भगवान के रूपों, नामों और गतिविधियों की दिव्य प्रकृति को नहीं समझ सकते। न ही वो लोग अपनी अटकलों या शब्दों से ऐसी बातों को व्यक्त कर सकते हैं।
 
अल्प ज्ञान वाले मूर्ख मनुष्य, किसी नाटक में पात्र की भांति अभिनय करने वाले भगवान के रूपों, नामों और गतिविधियों की दिव्य प्रकृति को नहीं समझ सकते। न ही वो लोग अपनी अटकलों या शब्दों से ऐसी बातों को व्यक्त कर सकते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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