श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.3.31 
यथा नभसि मेघौघो रेणुर्वा पार्थिवोऽनिले ।
एवं द्रष्टरि द‍ृश्यत्वमारोपितमबुद्धिभि: ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
बादल और धूल हवा के साथ बहते हैं, परंतु अल्पज्ञ लोग कहते हैं कि आकाश में बादल छाए हैं, हवा धूलमय है। ऐसे ही वे आत्मा के बारे में भी शारीरिक धारणाओं को आरोपित करते हैं।
 
बादल और धूल हवा के साथ बहते हैं, परंतु अल्पज्ञ लोग कहते हैं कि आकाश में बादल छाए हैं, हवा धूलमय है। ऐसे ही वे आत्मा के बारे में भी शारीरिक धारणाओं को आरोपित करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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