श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.3.25 
अथासौ युगसन्ध्यायां दस्युप्रायेषु राजसु ।
जनिता विष्णुयशसो नाम्ना कल्किर्जगत्पति: ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद, दो युगों के संगम पर, सृष्टि के स्वामी भगवान कल्कि अवतार के तौर पर जन्म लेंगे और विष्णु यशा के पुत्र होंगे। उस समय पृथ्वी के लगभग सभी शासक लुटेरे बन चुके होंगे।
 
Thereafter, the supreme God of the universe will take birth as Kalki avatar at the junction of two eras and Vishnu will be the son of Yasha. At that time, the rulers of the earth will have become robbers.
तात्पर्य
इस तरह यहाँ लॉर्ड कल्कि के आगमन की एक और भविष्यवाणी की गई है, जो परमेश्वर के अवतार हैं। उन्हें युगों के संगम पर प्रकट होना है, अर्थात कलियुग के अंत और सत्य युग के प्रारंभ में। चार युगों का चक्र, अर्थात सत्य, त्रेता, द्वापर और कलि, कैलेंडर के महीनों की तरह घूमता है। वर्तमान कलियुग 432,000 सालों तक चलता है, जिसमें से हम कुरुक्षेत्र की लड़ाई और राजा परीक्षित के शासन के अंत के बाद केवल 5,000 साल बीते हैं। इसलिए अब भी 427,000 साल का शेष है जो अभी ख़त्म होना बाकी है। इसलिए इस अवधि के अंत पर श्रीमद भागवतम् में भविष्यवाणी की गई है कि कल्कि का अवतार होगा। उनके पिता विष्णु यशा का नाम, जो एक विद्वान ब्राह्मण हैं, और गाँव संभल का उल्लेख भी किया गया है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, ये सभी भविष्यवाणियाँ कालानुक्रमिक क्रम में सत्य साबित होंगी। वही श्रीमद भागवतम् की शक्ति है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)