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श्लोक 1.3.24  |
तत: कलौ सम्प्रवृत्ते सम्मोहाय सुरद्विषाम् ।
बुद्धो नाम्नाञ्जनसुत: कीकटेषु भविष्यति ॥ २४ ॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात कलियुग के आरंभ में गये प्रान्त में श्रद्धालु आस्तिकों से ईर्ष्या करने वालों को मोहित करने के लिए भगवान् अनजना के पुत्र बुद्ध के रूप में प्रकट होंगे। |
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| तत्पश्चात कलियुग के आरंभ में गये प्रान्त में श्रद्धालु आस्तिकों से ईर्ष्या करने वालों को मोहित करने के लिए भगवान् अनजना के पुत्र बुद्ध के रूप में प्रकट होंगे। |
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