श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.3.20 
अवतारे षोडशमे पश्यन् ब्रह्मद्रुहो नृपान् ।
त्रि:सप्तकृत्व: कुपितो नि:क्षत्रामकरोन्महीम् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् के सोलहवें अवतार में, भृगुपति के रूप में, उन्होंने क्षत्रियों को इक्कीस बार नष्ट किया क्योंकि वे ब्राह्मणों (बुद्धिमान वर्ग) के खिलाफ विद्रोह करने के कारण उनसे क्रोधित थे।
 
भगवान् के सोलहवें अवतार में, भृगुपति के रूप में, उन्होंने क्षत्रियों को इक्कीस बार नष्ट किया क्योंकि वे ब्राह्मणों (बुद्धिमान वर्ग) के खिलाफ विद्रोह करने के कारण उनसे क्रोधित थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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