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श्लोक 1.3.2  |
यस्याम्भसि शयानस्य योगनिद्रां वितन्वत: ।
नाभिह्रदाम्बुजादासीद्ब्रह्मा विश्वसृजां पति: ॥ २ ॥ |
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| अनुवाद |
| पुरुष का एक अंश ब्रह्माण्ड के जल में लेटा हुआ है। उनके शरीर के नाभि-कमल से एक कमलनाल निकला है और इस कमलनाल के ऊपर खिले कमल के फूल से ब्रह्माण्ड के सभी शिल्पियों के स्वामी ब्रह्मा प्रकट हुए हैं। |
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| पुरुष का एक अंश ब्रह्माण्ड के जल में लेटा हुआ है। उनके शरीर के नाभि-कमल से एक कमलनाल निकला है और इस कमलनाल के ऊपर खिले कमल के फूल से ब्रह्माण्ड के सभी शिल्पियों के स्वामी ब्रह्मा प्रकट हुए हैं। |
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