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श्लोक 1.3.19  |
पञ्चदशं वामनकं कृत्वागादध्वरं बले: ।
पदत्रयं याचमान: प्रत्यादित्सुस्त्रिपिष्टपम् ॥ १९ ॥ |
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| अनुवाद |
| पन्द्रहवें अवतार में भगवान वामन का रूप धारण कर के महाराज बली द्वारा आयोजित यज्ञ में पधारे। यद्यपि वे हृदय से तीनों लोकों का राज्य पाना चाहते थे, किन्तु उन्होंने राजा से केवल तीन पग भूमि मागी। |
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| पन्द्रहवें अवतार में भगवान वामन का रूप धारण कर के महाराज बली द्वारा आयोजित यज्ञ में पधारे। यद्यपि वे हृदय से तीनों लोकों का राज्य पाना चाहते थे, किन्तु उन्होंने राजा से केवल तीन पग भूमि मागी। |
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