| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 1: सृष्टि » अध्याय 3: समस्त अवतारों के स्रोत : कृष्ण » श्लोक 11 |
|
| | | | श्लोक 1.3.11  | षष्ठमत्रेरपत्यत्वं वृत: प्राप्तोऽनसूयया ।
आन्वीक्षिकीमलर्काय प्रह्लादादिभ्य ऊचिवान् ॥ ११ ॥ | | | | | | अनुवाद | | पुरुष का छठा अवतार अत्रि मुनि के पुत्र के रूप में हुआ था। उनकी माता अनसूया थीं, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी। इस अवतार ने अलर्क, प्रह्लाद और यदु, हैहय आदि सहित अन्य लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान दिया। | | | | पुरुष का छठा अवतार अत्रि मुनि के पुत्र के रूप में हुआ था। उनकी माता अनसूया थीं, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी। इस अवतार ने अलर्क, प्रह्लाद और यदु, हैहय आदि सहित अन्य लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान दिया। | | ✨ ai-generated | | |
|
|