पहले, सारे महान संतों भगवान की सेवा की क्योंकि भगवान प्रकृति के तीनों गुणों से है। उन्होंने भौतिक स्थितियों से मुक्त होने के लिए और इस तरह अंतिम लाभ प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा की। जो कोई भी ऐसे महान संतों का अनुसरण करता है, वह भी भौतिक दुनिया से मुक्ति पाने के योग्य है।
In the past, all the great sages served the Lord because He is beyond the three modes of nature. They worshipped to be free from material conditions and thereby attain supreme benefit. Therefore, anyone who follows these great sages also becomes entitled to liberation in this material world.
तात्पर्य
धर्म करने का उद्देश्य न तो भौतिक लाभ प्राप्त करना है और न ही केवल भाव से पदार्थ को जानना है। धार्मिक कार्यों का परम लक्ष्य भौतिक बंधन से मुक्त होकर परलोक में स्वतंत्रतापूर्ण जीवन प्राप्त करना है, जहाँ भगवान व्यक्तित्व ही सर्वोच्च व्यक्ति हैं। इसलिए, धर्म के नियम सीधे भगवान व्यक्तित्व द्वारा बनाए गए हैं, और महाजन, या भगवान के अधिकृत एजेंटों को छोड़कर कोई भी धर्म के उद्देश्य को नहीं जानता है। भगवान के बारह विशिष्ट एजेंट हैं जो धर्म के उद्देश्य को जानते हैं, और वे सभी उनके लिए उत्कृष्ट सेवा करते हैं। जो लोग अपना भला चाहते हैं, वे इन महाजनों का पालन कर सकते हैं और इस प्रकार सर्वोच्च लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥