इसलिए, यह सोचना गलत है कि ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व के किसी भी गुण या किसी भी रूप की पूजा समान रूप से लाभकारी है। विष्णु को छोड़कर, सभी पृथक रूप भौतिक ऊर्जा की परिस्थितियों में प्रकट होते हैं, और इसलिए भौतिक ऊर्जा के रूप किसी को भी सत्व के मंच तक पहुँचने में मदद नहीं कर सकते, जो अकेले ही किसी व्यक्ति को भौतिक बंधन से मुक्त कर सकता है।
जीवन की असभ्य स्थिति, या निम्नतर जानवरों का जीवन, तमस भाव द्वारा नियंत्रित होता है। विभिन्न प्रकार के भौतिक लाभों के जुनून के साथ मनुष्य का सभ्य जीवन, रजस का चरण है। रजस जीवन स्तर दर्शन, कला और संस्कृति में नैतिक और नैतिक सिद्धांतों के साथ सूक्ष्म भावों के रूप में परम सत्य की प्राप्ति का एक हल्का सा सुराग देता है, लेकिन सत्व का भाव भौतिक गुण का एक और भी उच्च स्तर है, जो वास्तव में व्यक्ति को परम सत्य को महसूस करने में मदद करता है। दूसरे शब्दों में, विभिन्न प्रकार की पूजा विधियों के साथ-साथ ब्रह्मा, विष्णु और हर जैसे प्रमुख देवताओं से प्राप्त संबंधित परिणामों के बीच एक गुणात्मक अंतर होता है।
