भगवद-गीता (10.11) में भगवान कहते हैं कि अपने शुद्ध भक्तों पर विशेष कृपा दिखाने के लिए, वे व्यक्तिगत रूप से भक्त के हृदय में शुद्ध ज्ञान के प्रकाश को चालू करके सभी शंकाओं के घने अंधकार का उन्मूलन करते हैं। इसलिए, भगवान के व्यक्तित्व के हृदय के प्रकाश करने का प्रभार लेने के कारण, निश्चित रूप से एक भक्त, जो उनके सेवा में और दिव्य प्रेम में लगा हुआ है, अंधकार में नहीं रह सकता। वह निरपेक्ष और सापेक्ष सत्य के बारे में सबकुछ जान जाता है। भक्त अंधकार में नहीं रह सकता, और क्योंकि भक्त को भगवान के व्यक्तित्व ने प्रबुद्ध किया है, उसका ज्ञान निश्चित रूप से उत्तम है। ऐसा उनके लिए नहीं है जो परम सत्य का अध्ययन अपने स्वयं के सीमित दृष्टिकोण के बल पर करते हैं। उत्तम ज्ञान को परंपरा कहा जाता है, या अधिकार से विनम्र श्रवण प्राप्तकर्ता के पास आने वाले निगमनात्मक ज्ञान को, जो सेवा और समर्पण द्वारा सच्चा है। कोई परम के अधिकार को चुनौती नहीं दे सकता है और साथ ही उसे जान सकता है। वह एक ही साथ इस तरह की चुनौती देने वाली प्रकृति, संपूर्ण की एक महत्वहीन चिंगारी, भ्रामक ऊर्जा के नियंत्रण के अधीन छपाक, के सामने उजागर नहीं होने का अधिकार सुरक्षित रखता है। भक्त विनम्र हैं, और इसलिए पारलौकिक ज्ञान भगवान के व्यक्तित्व से ब्रह्मा तक और ब्रह्मा से उसके पुत्रों और शिष्यों तक परम्परा से आता है। इस प्रक्रिया में ऐसे भक्तों के भीतर परमात्मा मदद करता है। यह पारलौकिक ज्ञान सीखने का उत्तम तरीका है।
यह प्रबोधन भक्त को आत्मा को पदार्थ से अलग करने में पूर्ण रूप से सक्षम बनाता है क्योंकि आत्मा और पदार्थ की गाँठ को भगवान ने खोला है। इस गाँठ को अहंकार कहा जाता है, और यह एक जीवित प्राणी को झूठे तौर पर पदार्थ के साथ एकाकार होने के लिए बाध्य करता है। जैसे ही यह गाँठ ढीली होती है, इसलिए, संदेह के सभी बादल एक साथ साफ हो जाते हैं। वह अपने स्वामी को देखता है और पूरी तरह से प्रभु की पारलौकिक प्रेमपूर्ण सेवा में खुद को संलग्न करता है, फलदायी कार्रवाई की शृंखला की पूर्ण समाप्ति करता है। भौतिक अस्तित्व में, एक जीवित प्राणी फलदायी कार्य की अपनी श्रृंखला बनाता है और जीवन भर उन कार्यों के अच्छे और बुरे प्रभावों का आनंद लेता है। लेकिन जैसे ही वह खुद को प्रभु की प्रेममयी सेवा में लगाता है, वह तुरंत कर्म की श्रृंखला से मुक्त हो जाता है। उसके कार्य अब कोई प्रतिक्रिया नहीं पैदा करते हैं।
