ऊपर दिए गए शब्दों में यही बात बताई गई है। कोई भी साधारण व्यक्ति, या यहां तक कि वह व्यक्ति जिसने मानव जीवन में सफलता हासिल की है, भगवान के व्यक्तित्व को वैज्ञानिक या पूर्ण रूप से नहीं जान सकता है। मानव जीवन की पूर्णता तब प्राप्त होती है जब कोई व्यक्ति समझ सकता है कि वह पदार्थ का उत्पाद नहीं है बल्कि वास्तव में आत्मा है। और जैसे ही कोई व्यक्ति यह समझता है कि उसका पदार्थ से कोई लेना-देना नहीं है, वह तुरंत अपनी भौतिक लालसाओं को त्याग देता है और एक आध्यात्मिक प्राणी के रूप में जीवंत हो जाता है। सफलता की यह प्राप्ति तब संभव है जब कोई व्यक्ति रजोगुण और तमोगुण से ऊपर होता है, या दूसरे शब्दों में, जब वह वास्तव में योग्यता के आधार पर ब्राह्मण होता है। ब्राह्मण सत्व-गुण या अच्छाई के गुण का प्रतीक है। और अन्य, जो अच्छाई के गुण में नहीं हैं, या तो क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या शूद्र से भी कम हैं। ब्राह्मणिक अवस्था मानव जीवन की सर्वोच्च अवस्था है क्योंकि इसमें अच्छे गुण हैं। तो कोई भी व्यक्ति भक्त तब तक नहीं हो सकता जब तक वह कम से कम ब्राह्मण के रूप में योग्य न हो। भक्त कर्म से पहले से ही ब्राह्मण है। लेकिन इसका यहीं अंत नहीं है। जैसा कि ऊपर बताया गया है, ऐसे ब्राह्मण को वास्तव में वैष्णव बनना होता है ताकि वह वास्तव में पारलौकिक अवस्था में हो। एक शुद्ध वैष्णव एक मुक्त आत्मा होती है और ब्राह्मण की स्थिति से भी परे होती है। भौतिक अवस्था में एक ब्राह्मण भी एक बद्ध आत्मा होती है क्योंकि ब्राह्मणिक अवस्था में यद्यपि ब्रह्म या परात्पर की अवधारणा का एहसास होता है, परमेश्वर के बारे में वैज्ञानिक ज्ञान की कमी होती है। भगवान के व्यक्तित्व कृष्ण को समझने के लिए व्यक्ति को ब्राह्मणिक अवस्था से आगे निकलकर वासुदेव अवस्था तक पहुंचना होता है। भगवान के व्यक्तित्व का विज्ञान आध्यात्मिक पथ पर स्नातकोत्तर छात्रों के अध्ययन का विषय है। मूर्ख व्यक्ति, या ज्ञान की कमी वाले व्यक्ति, परमेश्वर को नहीं समझ पाते और कृष्ण की व्याख्या अपनी-अपनी इच्छानुसार करते हैं। हालाँकि, तथ्य यह है कि कोई भी व्यक्ति भगवान के व्यक्तित्व के विज्ञान को तब तक नहीं समझ सकता जब तक कि वह भौतिक गुणों के संदूषण से मुक्त न हो जाए, यहां तक कि ब्राह्मण की अवस्था तक भी। जब कोई योग्य ब्राह्मण वास्तव में वैष्णव बन जाता है, तो मुक्ति की जीवंत अवस्था में वह जान सकता है कि भगवान का व्यक्तित्व वास्तव में क्या है।
