भक्त भागवत भगवान के व्यक्तित्व, भगवान के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए भक्त भागवत को प्रसन्न करके व्यक्ति को भागवत पुस्तक का लाभ प्राप्त हो सकता है। मानवीय तर्क यह समझने में विफल रहता है कि भक्त भागवत या पुस्तक भागवत की सेवा करने से मनुष्य को भक्ति के मार्ग पर क्रमिक उन्नति कैसे मिलती है। लेकिन वास्तव में ये वे तथ्य हैं जिन्हें श्रील नारददेव ने समझाया है, जो अपने पिछले जीवन में एक दासी का पुत्र था। दासी ऋषियों की तुच्छ सेवा में लगी हुई थी, और इस प्रकार वह भी उनके संपर्क में आया। और केवल उनके साथ जुड़कर और ऋषियों द्वारा छोड़े गए खाने के बचे हुए भोजन को स्वीकार करके, दासी के पुत्र को महान भक्त और व्यक्तित्व श्रील नारददेव बनने का मौका मिला। ये भागवतों के संबंध का चमत्कारी प्रभाव है। और इन प्रभावों को व्यवहार में समझने के लिए, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस तरह के भागवतों के निष्ठावान सहयोग से मनुष्य को निश्चित रूप से पारलौकिक ज्ञान बहुत आसानी से प्राप्त होता है, जिसके परिणामस्वरूप वह भगवान की भक्ति सेवा में नियत हो जाता है। जैसे-जैसे भागवतों के मार्गदर्शन में भक्ति सेवा में अधिक प्रगति होती है, वैसे-वैसे व्यक्ति भगवान की पारलौकिक प्रेमपूर्ण सेवा में अधिक दृढ़ होता जाता है। अतः भागवत पुस्तक के संदेशों को भक्त भागवत से प्राप्त करना होगा और इन दोनों भागवतों का संयोजन नवोदित भक्त को निरंतर प्रगति करने में मदद करेगा।
