प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में परमात्मा के रूप में विराजमान और सच्चे भक्तों के हितैषी भगवान श्रीकृष्ण उस भक्त के हृदय से भौतिक सुख-सुविधाओं की इच्छा को दूर कर देते हैं जिसने उनकी कथाओं को सुनने में रुचि दिखाई है, क्योंकि ये कथाएँ ठीक ढंग से सुनने और कहने पर अत्यधिक पुण्यदायी होती हैं।
Lord Sri Krishna, who is situated in every heart in the form of the Supersoul and is the benefactor of truthful devotees, removes the desire for material enjoyment from the heart of a devotee who has developed an interest in hearing His stories, which are extremely meritorious when heard and narrated properly.
तात्पर्य
भगवान के व्यक्तित्व श्रीकृष्ण के संदेश उनसे भिन्न नहीं हैं। इसलिए जब भी ईश्वर का अनाक्रामक श्रवण और महिमा का गायन किया जाता है, तो यह समझना चाहिए कि भगवान कृष्ण वहाँ आध्यात्मिक ध्वनि के रूप में विद्यमान हैं, जो व्यक्तिगत रूप से भगवान जितने ही शक्तिशाली हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने शिकाष्टक में स्पष्ट रूप से घोषित किया है कि भगवान के पवित्र नाम में भगवान की सभी शक्तियाँ हैं और उन्होंने अपने असंख्य नामों को उसी शक्ति से संपन्न किया है। समय का कोई कठोर निर्धारण नहीं है और कोई भी अपनी सुविधानुसार ध्यान और श्रद्धा से पवित्र नाम का जाप कर सकता है। भगवान हमारे प्रति इतने दयालु हैं कि वे आध्यात्मिक ध्वनि के रूप में हमारे सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से भगवान के नाम और उनकी गतिविधियों को सुनने और उनकी महिमा करने का हमारे अंदर कोई स्वाद नहीं है। हम पहले ही पवित्र ध्वनि को सुनने और जपने के लिए रुचि विकसित करने पर चर्चा कर चुके हैं। यह भगवान के शुद्ध भक्त की सेवा के माध्यम से किया जाता है। भगवान अपने भक्तों के प्रति पारस्परिक रूप से उत्तरदायी हैं। जब वह देखते हैं कि भक्त भगवान की दिव्य सेवा में प्रवेश पाने में पूरी तरह ईमानदार है और इस तरह उसके बारे में सुनने के लिए उत्सुक हो गया है, तो भगवान भक्त के भीतर से इस तरह से कार्य करते हैं जिससे भक्त आसानी से उनके पास वापस जा सके। हम जितनी इच्छा कर सकते हैं उससे कहीं अधिक भगवान हमें अपने राज्य में वापस ले जाने के लिए उत्सुक हैं। हम में से अधिकांश ईश्वर के पास वापस जाने की बिल्कुल भी इच्छा नहीं करते हैं। केवल बहुत कम लोग ही ईश्वर के पास वापस जाना चाहते हैं। लेकिन जो कोई भी भगवान के पास वापस जाना चाहता है, श्री कृष्ण हर तरह से उसकी मदद करते हैं। जब तक कोई भी सभी पापों से पूरी तरह से मुक्त नहीं हो जाता है, वह ईश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता है। भौतिक प्रकृति पर प्रभुता करने की हमारी इच्छाओं के उत्पाद भौतिक पाप हैं। ऐसी इच्छाओं से छुटकारा पाना बहुत मुश्किल है। महिलाएँ और धन ईश्वर के पास वापस जाने के मार्ग पर प्रगति करने वाले भक्त के लिए बहुत कठिन समस्याएँ हैं। भक्ति मार्ग के कई दिग्गज इन प्रलोभनों का शिकार होकर मुक्ति के मार्ग से पीछे हट गए। लेकिन जब भगवान स्वयं मदद करते हैं, तो भगवान की दिव्य कृपा से पूरी प्रक्रिया कुछ भी हो जाए उतनी ही आसान हो जाती है। महिलाओं और धन के संपर्क में बेचैन होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि हर जीवित प्राणी प्राचीन काल से, व्यावहारिक रूप से अनादि काल से ऐसी चीजों से जुड़ा हुआ है और इस विदेशी प्रकृति से उबरने में समय लगता है। लेकिन अगर कोई भगवान की महिमा का श्रवण करने में लगा हुआ है, तो वह धीरे-धीरे अपनी वास्तविक स्थिति का एहसास करता है। भगवान की कृपा से ऐसे भक्त को अशांति की स्थिति से खुद का बचाव करने के लिए पर्याप्त शक्ति मिलती है और धीरे-धीरे उसके मन से सभी अशांत करने वाले तत्व समाप्त हो जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥