| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 1: सृष्टि » अध्याय 2: दिव्यता तथा दिव्य सेवा » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 1.2.14  | तस्मादेकेन मनसा भगवान् सात्वतां पति: ।
श्रोतव्य: कीर्तितव्यश्च ध्येय: पूज्यश्च नित्यदा ॥ १४ ॥ | | | | | | अनुवाद | | अतः मनुष्य को अपना ध्यान केन्द्रित रख कर उन परम पुरुषोत्तम भगवान् की महिमा, कीर्तन, स्मरण और पूजा निरंतर करनी चाहिए, जो भक्तों के रक्षक हैं। | | | | अतः मनुष्य को अपना ध्यान केन्द्रित रख कर उन परम पुरुषोत्तम भगवान् की महिमा, कीर्तन, स्मरण और पूजा निरंतर करनी चाहिए, जो भक्तों के रक्षक हैं। | | ✨ ai-generated | | |
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